शौर्य......


हूँ आर्य नहीं,
ना पुरु हूँ मैं.
ना शुक्र कोई,
ना गुरु हूँ मैं.

ना राजन कोई,
विलासी हूँ.
घनघोर ना घट,
सन्यासी हूँ.

मैं रागों का,
आकार नहीं.
ना गीतों का,
अभिलाषी हूँ.

ना शम्भू सम,
हैं तीन नयन.
ना शेष शयन,
निवासी हूँ.

अली गुंजन का,
मद्धिम शोर नहीं.
कोई फागुन की,
भीनी भोर नहीं.

ना रिमझिम रिमझिम,
बरखा हूँ.
ना मथुरा हूँ,
ना काशी हूँ.

हूँ प्रखर नाद,
मैं तुरही का.
अश्वों की टाप,
का साथी हूँ.

नेपथ्य से आया,
योद्धा हूँ.
रणभूमि का अचल,
निवासी हूँ.

सातों सुर मेरे,
बाण ही हैं.
टंकार राग,
अभिलाषी हूँ.

जेठों के जलते,
झाड में हूँ.
मैं शीत में हूँ,
और बाढ़ में हूँ.

हूँ क्रंदन में,
नीरवता में.
फट कर गिरते,
आषाढ़ में हूँ.

हूँ क्रोधी एक,
छलावा हूँ.
मृत्यु को यम,
का बुलावा हूँ.

हूँ विजय भी मैं,
और विजय का पथ.
साहस हूँ मैं,
अविनाशी हूँ.

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